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सोमवार, 21 नवंबर 2011

प्यार स्वतन्त्र नहीं__स्वछंद है |

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प्यार स्वतन्त्र नहीं स्वछंद है. प्यार को विशेष रूप से नहीं, सहजता से अपनाना चाहिए.
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प्यार स्थाई होता है, इसके लिए अपने स्वभाव की स्थितियां संवार के रखनी होती है.
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दो व्यक्तियों के द्वारा स्वयं की और समाज की मर्यादाओं का आदर रखते हुए प्यार करना वैधानिक है   
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प्यार के प्रति भी किसी को आशक्ति नहीं होनी चाहिए, विशवास होना चाहिए.
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प्यार हमें सेक्स की तरफ नहीं ले जाता है हम उसके स्वछंद गुण के कारण भटक कर बहाव में सेक्स की तरफ मार्ग बना लेते है.
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"प्यार" का रिश्ते से कोई सम्बन्ध नहीं होता है. "प्यार" को रिश्ते की मर्यादा युक्त भावना के अनुसार उस रिश्ते में 'प्यार का रंग' (प्यार रूपी रंग) भरा जाता है. तब यह कह सकते है कि "प्यार" को मैंने अपने जीवन में साकार द्रश्य दे दिया.
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"प्यार" जीवन में लुफ्त लेने की चीज नहीं है. यह तो "प्रसाद" होता है.
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आपका स्नेही - यशवंतसिंह 



मंगलवार, 1 नवंबर 2011

मर्म

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एक बौद्धिक व्यक्ति एक कठिन रास्ते में एक साधारण बात कहते हैं
कलाकार कठिन बात साधारण तरीके से कला के
द्वारा
से कहता हैं


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ईश्वर की "कृपा के फल" से ही प्रेम हो सकता है 
ना कि बाहरी आकर्षण से 
बाहरी आकर्षण से दो पक्षों के द्वारा आगे बढ़कर बातचीत व्यवहार करते हुए आपस में समझने की प्रक्रिया के अंत से 
प्रेम तक पहुंचा जा सकता है |
 ( ईश्वर की "कृपा का फल" अर्थात "सकारात्मक ऊर्जा")

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"तरुणसागर लुहार है पर इनका प्रेम अपार है"
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आदरणीय मुनि तरुणसागर जी के वचनों में कठोरता होती है | किन्तु कठोरता में छिपी प्रियता बहुत होती है | 

इतनी प्रियता तो बच्चों के माता-पिता में भी नहीं होती है |
( खारी बोल्या मायड़ी मीठा बोल्या लोग )
 
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जिन विचारों से तुम्हे सजाया वो विचार ही तुमने उड़ा दिए
जब हमने उन्हें देखा तो वे दिल में तुम्हारे मिले |

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मित्रत्व - एक साधारण और स्वछंद व्यवहार
 
इस मत से मित्रता का अर्थ है
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एक दुसरे को आपस में सँभालते रहना, सही समझ की तरफ बढ़ाना, सहयोग करना, कमजोर नहीं पड़ने देना, प्रसन्न रखना, आहत ना होने देना, ईमानदारी पूर्वक व्यवहार, पारदर्शिता बढ़ाना, सामंजस्यता बनाए रखना, अच्छे विकासात्मक सुझाव देना आदि
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केवल रिश्ते के '
नाम शब्द' पर नहीं चलना, रुदिवादी -विचार स्वीकार नहीं करना.. आदि.

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इस दुनिया की असली समस्या यह है 

कि मुर्ख व अड़ियल लोग अपने बारे में हमेशा पक्के होते है
(कि वे सही है)
किन्तु बुद्धिमान लोग हमेशा संदेह में रहते है

(कि मैं गलत तो नहीं हूँ ) 
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